There are no items in your cart
Add More
Add More
| Item Details | Price | ||
|---|---|---|---|

वित्त वर्ष 2025-26 भारत के लिए व्यापार के मामले में एक यादगार साल रहा। इस साल देश का कुल वस्तु निर्यात 441.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। पिछले साल के मुकाबले यह करीब 1% ज़्यादा है।अगर सेवा क्षेत्र यानी सर्विसेज़ को भी जोड़ लें, तो कुल निर्यात 860 अरब डॉलर के पार चला गया यह भी एक नया रिकॉर्ड है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसे देश के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि पूरी दुनिया में मुश्किलें थीं, फिर भी भारत ने अपना कदम आगे बढ़ाया।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह आसान समय में नहीं मिली। पूरे साल भारतीय निर्यातकों को कई मोर्चों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा।अमेरिका की ओर से ऊंचे टैरिफ लगाए गए, जिससे निर्यात पर दबाव रहा। साल के शुरुआती महीनों में तेल की कीमतें कम रहीं, जिससे डीज़ल और विमान ईंधन जैसे उत्पादों का निर्यात मूल्य कम रहा। और फिर मार्च में वेस्ट एशिया में जंग जैसे हालात बन गए, जिसने भारत के उस क्षेत्र से होने वाले व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया।वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि मार्च में वेस्ट एशिया को भारत का निर्यात करीब 58% गिर गया। जहां आमतौर पर हर महीने इस क्षेत्र को करीब 6 अरब डॉलर का निर्यात होता है, वहीं मार्च में यह घटकर महज 2.5 अरब डॉलर रह गया। इसी वजह से मार्च में कुल निर्यात में 7.6% की गिरावट आई और यह 38.9 अरब डॉलर रहा।हालांकि एक राहत की बात यह रही कि गैर-तेल निर्यात में 3.6% की बढ़त दर्ज हुई, जो दिखाता है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग और दूसरे सेक्टर सही दिशा में जा रहे हैं।
जहां एक तरफ निर्यात ने नई ऊंचाई छुई, वहीं आयात भी तेज़ी से बढ़ा। वस्तु आयात 7.5% बढ़कर 775 अरब डॉलर हो गया। सेवाओं समेत कुल आयात 920 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया।इसका नतीजा यह निकला कि व्यापार घाटा यानी आयात और निर्यात का फर्क बढ़कर 333 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह एक बड़ा आंकड़ा है और अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात भी। हालांकि मार्च में आयात भी 6.4% घटकर 59.6 अरब डॉलर रहा, जिससे उस महीने का व्यापार घाटा नौ महीनों के निचले स्तर 20.7 अरब डॉलर पर आ गया।
व्यापार घाटे के पीछे एक बड़ी वजह सोने और चांदी का बढ़ा हुआ आयात है।सोने का आयात 24% बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। दिलचस्प बात यह है कि मात्रा में सोने का आयात 4.76% घटा यानी कम सोना आया, लेकिन कीमतें इतनी ज़्यादा थीं कि बिल ज़्यादा हो गया। FY25 में सोने का भाव 76,617 डॉलर प्रति किलो था, जो FY26 में बढ़कर 99,825 डॉलर प्रति किलो हो गया। देश में इस समय सोने का भाव करीब 1,56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा है।चांदी की बात करें तो उसका आयात मूल्य में करीब 150% उछल गया और यह 12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। मात्रा में भी 42% की बढ़ोतरी हुई।भारत स्विट्ज़रलैंड, UAE और दक्षिण अफ्रीका से सबसे ज़्यादा सोना मंगाता है। अकेले स्विट्ज़रलैंड की 40% हिस्सेदारी है। सरकार ने इस पर लगाम लगाने के लिए सोने, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर कुछ पाबंदियां भी लगाई हैं।
आने वाले समय में कुछ अच्छी खबरें भी हैं। सरकार ब्रिटेन, ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार समझौते (FTA) करने की दिशा में काम कर रही है। अगर ये समझौते हो जाते हैं तो भारत के निर्यात को नई रफ्तार मिल सकती है।इसके अलावा, विदेश से आने वाले पैसे यानी रेमिटेंस और सेवा क्षेत्र से अच्छी कमाई भारत के लिए राहत की बात है। वाणिज्य सचिव ने भी कहा कि व्यापार घाटा फिलहाल बहुत बड़ी चिंता नहीं है क्योंकि रेमिटेंस इस अंतर को काफी हद तक भरता है।
कुल मिलाकर देखें तो FY26 भारत के लिए मिला-जुला साल रहा। एक तरफ रिकॉर्ड निर्यात की खुशी है, दूसरी तरफ बढ़ते आयात और व्यापार घाटे की चिंता भी। वेस्ट एशिया संकट, अमेरिकी टैरिफ और महंगे सोने-चांदी जैसी कई चुनौतियों के बावजूद भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। यह दिखाता है कि भारतीय व्यापार में मज़बूती आ रही है। आने वाले वर्षों में नए व्यापार समझौतों और सेवा क्षेत्र की ताकत के दम पर भारत अपनी इस रफ्तार को और तेज़ कर सकता है।

nitish kumar
A California-based travel writer, lover of food, oceans, and nature.